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Happy Republic Day 2026

अच्छा ये बताइए — अपने बचपन में हम में से कितने लोग स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस पर इसलिए स्कूल जाया करते थे, क्योंकि वहाँ हमें लड्डू (sweet dessert) मिलने वाले होते थे?
बचपन में यही हमारे लिए सबसे बड़ी बात होती थी।

साल में यही तो दो दिन होते थे जब स्कूल में पढ़ाई के अलावा बाकी सब कुछ होता था।
कुछ बच्चे कविता सुनाते थे,
तो किसी ने देश के स्वतंत्रता नायकों पर लेख लिखा होता था।

और कुछ बच्चे मेरे जैसे भी होते थे — जिन्हें बस लड्डुओं का इंतज़ार रहता था।

सबसे पहले स्कूल पहुँचते ही राष्ट्रगान होता था। फिर टीचर आकर स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस के मौके पर बच्चों को देश के बारे में संबोधित करते थे। इसके बाद बच्चे अपनी कविताएँ या अपना लिखा हुआ लेख सुनाते थे।

मैंने बहुत याद करने की कोशिश की, लेकिन मुझे किसी भी टीचर की कही हुई कोई खास बात याद नहीं आती।
अगर आपको अपने किसी टीचर की कही हुई बात याद हो, तो कमेंट में ज़रूर लिखिए।

हमें तो बहुत समय तक ये भी नहीं पता था कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस क्यों मनाए जाते हैं।


Cut to 2022

बेल बजती है और मैं जाकर गेट खोलता हूँ।
सोसाइटी के कुछ लोग मुझे भारतीय झंडा देते हैं और कहते हैं कि इसे अपनी खिड़की पर लगा देना।
“Happy Republic Day” कहकर वे आगे बढ़ जाते हैं।

मैं अब 32 साल का हूँ और काम के लिए मुंबई में रहता हूँ।

बिल्डिंग में देशभक्ति के गाने बज रहे हैं।
लोग “Happy Republic Day to you and your family” लिखकर मैसेज भेज रहे हैं।
मैं भी सबको रिप्लाई कर रहा हूँ।

लोग सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल रहे हैं,
कुछ लोग WhatsApp स्टेटस पर तिरंगा लगा रहे हैं।

सब कुछ अच्छा चल रहा है।
सभी लोग भारतीय संविधान की सालगिरह मना रहे हैं।

लेकिन अचानक दिमाग में एक सवाल आता है —
आख़िर ये भारतीय संविधान है क्या?

इस संविधान ने हमें ऐसा क्या दिया है, जिसे हम हर साल सेलिब्रेट करते हैं?
कहीं ऐसा तो नहीं कि हम भी बचपन की तरह सिर्फ इसलिए मना रहे हैं क्योंकि सब मना रहे हैं?

हमें बताया गया कि 1950 में संविधान मिला था, इसलिए सेलिब्रेट करना चाहिए —
और हम बस यही जानकर मना रहे हैं।

क्या हमें सच में पता है कि भारतीय संविधान क्या है
और ये हमें कौन-कौन से अधिकार देता है?


Our Indian Constitution

चलो, आज अपने संविधान की प्रस्तावना पढ़ते हैं।

Indian Constitution's Preamble

भारत के संविधान की प्रस्तावना (हिंदी)

हम, भारत के लोग, भारत को एक
सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, समाजवादी, पंथ-निरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य
बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को:

सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, श्रद्धा और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समानता,
प्राप्त कराने के लिए तथा उन सब में

व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता
सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए,

हमारी संविधान सभा में,
आज तारीख छब्बीस नवम्बर, 1949 को
इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।


सरल शब्दों में कहें तो हमारा संविधान हमें समानता का अधिकार देता है —
चाहे वह धर्म के आधार पर हो या आर्थिक स्थिति के आधार पर।

किसी भी वर्ग, जाति या समाज से हो,
सभी व्यक्ति भारत में समान हैं
और अपने विचार स्वतंत्र रूप से रख सकते हैं।

भारत को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी है कि
हम सब समान हों
और संविधान द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करें।

अब मैं आपसे पूछना चाहता हूँ —
क्या आपको लगता है कि हम सच में इन बातों का ध्यान रखते हैं?

आपने कई बार देखा होगा कि किसी ऑफिस में
कोई सीनियर बॉस अपने जूनियर कर्मचारी से चिल्लाकर बात करता है।

किसी को सड़क पर यूँ ही कचरा फेंकते हुए,
या पब्लिक प्लेस पर पान-मसाला थूकते हुए देखा होगा।

किसी दूसरे वर्ग, जाति या धर्म के व्यक्ति के लिए
गलत शब्दों का इस्तेमाल करते हुए भी देखा होगा।

ये तो बस कुछ उदाहरण हैं।

मैं यहाँ सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि
हम सब गणतंत्र दिवस तो मनाते हैं,
लेकिन समाज में कुछ लोग ऐसे भी हैं
जो संविधान द्वारा बनाए गए नियमों का बिल्कुल भी पालन नहीं करते।

हम सभी का प्रयास यह होना चाहिए कि
इस गणतंत्र दिवस से हम कुछ सीखें
और एक ज़िम्मेदार भारतीय नागरिक की तरह व्यवहार करें।

इसके लिए बहुत बड़े बदलाव करने की ज़रूरत नहीं है।
बस छोटे-छोटे बदलाव ही काफ़ी हैं।

जैसे —
ट्रैफिक सिग्नल जंप न करना,
एक ही लेन में चलना,
कचरा सड़क पर न फेंककर डस्टबिन में डालना।

लोगों से ठीक से बात करना।
यहाँ तक कि अगर आप सब्ज़ी लेने जाते समय
पॉलिथीन की जगह कपड़े का बैग इस्तेमाल करते हैं,
तो भी आप देश और पर्यावरण के लिए अच्छा काम कर रहे हैं।

भारतीय संविधान कोई किताब भर नहीं है —
यह हमारी रोज़ की choices से जुड़ा हुआ है।

डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने संविधान सभा में कहा था कि संविधान उतना ही प्रभावी होता है, जितना उसे लागू करने वाले लोग।

मैं अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करूँगा
कि इन छोटी-छोटी बातों को अपनी ज़िंदगी में अपनाऊँ।

और उम्मीद करता हूँ कि
इस गणतंत्र दिवस से आप भी
इन बदलावों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएँगे।

Happy Republic Day 🇮🇳

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